वनमभ्यागतो दुःखी निरस्तश्चाप्तबन्धुभिः । सोऽहं न वेद्मि पुत्राणां कुशलाकुशलात्मिकाम् ॥
अपने बन्धु-बान्धवों द्वारा त्यागा हुआ मैं दुःखी होकर वन में आ गया हूँ। अब मुझे यह भी नहीं मालूम कि मेरे पुत्र कुशल से हैं या नहीं।
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