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दुर्गासप्तशती • अध्याय 2 • श्लोक 16
सञ्चितः सोऽतिदुःखेन क्षयं कोशो गमिष्यति । एतच्चान्यच्च सततं चिन्तयामास पार्थिवः ॥
बहुत कठिन परिश्रम से एकत्र किया गया वह खजाना नष्ट हो जाएगा—ऐसे और भी अनेक विचार वह राजा निरंतर करता रहा।
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