मद्भृत्यैस्तैरसद्वृत्तैर्धर्मतः पाल्यते न वा । न जाने स प्रधानो मे शूरो हस्ती सदामदः ॥
वे दुष्ट स्वभाव वाले मेरे सेवक क्या अब उस नगर की धर्मपूर्वक रक्षा करते होंगे या नहीं, मैं नहीं जानता। मेरा वह वीर और सदा मदोन्मत्त हाथी अब किसके अधीन होगा।
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