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दुर्गासप्तशती • अध्याय 2 • श्लोक 11
तस्थौ कञ्चित्स कालं च मुनिना तेन सत्कृतः । इतश्चेतश्च विचरंस्तस्मिन् मुनिवराश्रमे ॥
वह वहाँ कुछ समय तक उस मुनि द्वारा सत्कार प्राप्त करके रहा और उस श्रेष्ठ मुनि के आश्रम में इधर-उधर विचरण करता रहा।
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