मैं रुद्र के लिए धनुष को तानती हूँ ताकि ब्रह्मद्वेषियों का संहार किया जा सके। मैं लोगों के लिए युद्ध में सामर्थ्य प्रदान करती हूँ और आकाश तथा पृथ्वी में व्याप्त रहती हूँ।
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