यन्मात्राबिन्दुबिन्दुद्वितयपदपदद्वन्द्ववर्णादिहीनं भक्त्याभक्त्यानुपूर्वं प्रसभकृतिवशात् व्यक्तमव्यक्तमम्ब । मोहादज्ञानतो वा पठितमपठितं साम्प्रतं ते स्तवेऽस्मिन् तत् सर्वं साङ्गमास्तां भगवति वरदे त्वत्प्रसादात् प्रसीद ॥
हे अम्बे, इस स्तोत्र में जो भी मात्रा, बिंदु, अक्षर या शब्दों की त्रुटि भक्तिभाव से या बिना भक्तिभाव के, जानकर या अज्ञानवश मुझसे हुई हो, वह सब आपकी कृपा से पूर्ण हो जाए; हे वरदायिनी भगवती, मुझ पर प्रसन्न हों।
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