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दुर्गासप्तशती • अध्याय 15 • श्लोक 7
यदत्र पाठे जगदम्बिके मया विसर्गबिन्द्वक्षरहीनमीरितम् । तदस्तु सम्पूर्णतमं प्रसादतः सङ्कल्पसिद्धिश्च सदैव जायताम् ॥
हे जगदम्बिके, इस पाठ में मेरे द्वारा जो विसर्ग, बिंदु या अक्षरों की त्रुटि हुई हो, वह आपकी कृपा से पूर्ण हो जाए और मेरा संकल्प सदा सिद्ध हो।
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