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दुर्गासप्तशती • अध्याय 14 • श्लोक 30
एवं देव्या वरं लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः । सूर्याज्जन्म समासाद्य सावर्णिर्भविता मनुः ॥ क्लीं ॐ ॥
इस प्रकार देवी से वर प्राप्त करके श्रेष्ठ क्षत्रिय राजा सुरथ सूर्य से जन्म प्राप्त कर सावर्णि मनु बनेंगे।
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