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दुर्गासप्तशती • अध्याय 14 • श्लोक 13
परितुष्टा जगद्धात्री प्रत्यक्षं प्राह चण्डिका ॥
तब जगत की धारिणी चण्डिका प्रसन्न होकर उनके सामने प्रकट हुईं और बोलीं।
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