शत्रुभ्यो न भयं तस्य दस्युतो वा न राजतः । न शस्त्रानलतोयौघात् कदाचित् सम्भविष्यति ॥
उसे न शत्रुओं से भय होगा, न डाकुओं से और न राजा से; न ही कभी शस्त्र, अग्नि या जल के प्रकोप से उसका अनिष्ट होगा।
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