न तेषां दुष्कृतं किञ्चिद्दुष्कृतोत्था न चापदः । भविष्यति न दारिद्र्यं न चैवेष्टवियोजनम् ॥
उनके किसी भी पाप का प्रभाव नहीं रहेगा, न ही पापजनित संकट उत्पन्न होगा; न दरिद्रता आएगी और न ही प्रिय वस्तुओं से वियोग होगा।
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