जगद्विध्वंसके तस्मिन् महोग्रेऽतुलविक्रमे । निशुम्भे च महावीर्ये शेषाः पातालमाययुः ॥
उस अत्यन्त उग्र और अतुल पराक्रमी जगत-विनाशक निशुम्भ के भी मारे जाने पर शेष दैत्य पाताल में चले गए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
दुर्गासप्तशती के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
दुर्गासप्तशती के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।