पश्यतां सर्वदेवानां तत्रैवान्तरधीयत । तेऽपि देवा निरातङ्काः स्वाधिकारान्यथा पुरा ॥
सभी देवताओं के देखते-देखते वहीं अंतर्धान हो गईं और देवता भी भयमुक्त होकर पहले की भाँति अपने-अपने अधिकारों में स्थित हो गए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
दुर्गासप्तशती के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
दुर्गासप्तशती के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।