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दुर्गासप्तशती • अध्याय 13 • श्लोक 32
इत्युक्त्वा सा भगवती चण्डिका चण्डविक्रमा ॥
ऐसा कहकर वह भगवती चण्डिका, जो अत्यन्त प्रचण्ड पराक्रम वाली हैं।
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