दस्युभिर्वा वृतः शून्ये गृहीतो वापि शत्रुभिः । सिंहव्याघ्रानुयातो वा वने वा वनहस्तिभिः ॥
या डाकुओं से घिर जाए, निर्जन स्थान में शत्रुओं द्वारा पकड़ा जाए, या जंगल में सिंह, व्याघ्र अथवा हाथियों द्वारा घिर जाए।
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