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दुर्गासप्तशती • अध्याय 13 • श्लोक 22
प्रीतिर्मे क्रियते सास्मिन् सकृदुच्चरिते श्रुते । श्रुतं हरति पापानि तथारोग्यं प्रयच्छति ॥
उसी प्रकार की प्रसन्नता मुझे इस माहात्म्य के एक बार उच्चारण या श्रवण से भी होती है। इसका श्रवण पापों को नष्ट करता है और आरोग्य प्रदान करता है।
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