विप्राणां भोजनैर्होमैः प्रोक्षणीयैरहर्निशम् । अन्यैश्च विविधैर्भोगैः प्रदानैर्वत्सरेण या ॥
ब्राह्मणों को भोजन कराने, हवन करने, पवित्र जल से अभिषेक करने और वर्ष भर विविध प्रकार के भोग तथा दान देने से जो प्रसन्नता मुझे प्राप्त होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
दुर्गासप्तशती के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
दुर्गासप्तशती के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।