शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी । तस्यां ममैतन्माहात्म्यं श्रुत्वा भक्तिसमन्वितः ॥
शरद ऋतु में जो मेरी वार्षिक महापूजा की जाती है, उसमें जो भक्तिभाव से मेरे इस माहात्म्य को सुनता है।
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