बलिप्रदाने पूजायामग्निकार्ये महोत्सवे । सर्वं ममैतन्माहात्म्यम् उच्चार्यं श्राव्यमेव च ॥
बलि देने, पूजा करने, अग्निहोत्र करने या किसी महोत्सव के समय मेरे इस सम्पूर्ण माहात्म्य का उच्चारण और श्रवण अवश्य करना चाहिए।
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