हे देवी, सभी विद्याएँ आपकी ही भिन्न-भिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं और जगत की सभी स्त्रियाँ भी आपके ही रूप हैं। हे अम्बे, इस सम्पूर्ण जगत को आपने ही व्याप्त कर रखा है, तब आपकी स्तुति के लिए कौन से श्रेष्ठ वचन कहे जा सकते हैं।
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