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दुर्गासप्तशती • अध्याय 12 • श्लोक 51
रक्षांसि भक्षयिष्यामि मुनीनां त्राणकारणात् । तदा मां मुनयः सर्वे स्तोष्यन्त्यानम्रमूर्तयः ॥
मुनियों की रक्षा के लिए मैं राक्षसों का भक्षण करूँगी और तब सभी मुनि विनम्र होकर मेरी स्तुति करेंगे।
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