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दुर्गासप्तशती • अध्याय 12 • श्लोक 5
त्वं वैष्णवीशक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया । सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः ॥
आप अनन्त पराक्रम वाली वैष्णवी शक्ति हैं, आप ही इस विश्व की परम बीजस्वरूप माया हैं। हे देवी, यह समस्त जगत आपकी माया से मोहित है, परंतु आपके प्रसन्न होने पर यही मुक्ति का कारण बनती है।
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