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दुर्गासप्तशती • अध्याय 12 • श्लोक 47
ततः शतेन नेत्राणां निरीक्षिष्याम्यहं मुनीन् । कीर्तयिष्यन्ति मनुजाः शताक्षीमिति मां ततः ॥
तब मैं सौ नेत्रों से मुनियों की ओर देखूँगी और उस कारण मनुष्य मुझे शताक्षी नाम से प्रसिद्ध करेंगे।
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