नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भसम्भवा । ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी ॥
तब मैं नन्दगोप के घर यशोदा के गर्भ से जन्म लेकर विन्ध्याचल में निवास करती हुई उन दोनों का नाश करूँगी।
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