हे देवी, जैसे आपने अभी असुरों का वध करके हमें शत्रुओं के भय से मुक्त किया है, वैसे ही सदा हमारी रक्षा कीजिए। समस्त जगत के पापों को शीघ्र शांत कीजिए और उत्पातों तथा विपत्तियों से उत्पन्न महान संकटों को भी दूर कीजिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
दुर्गासप्तशती के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
दुर्गासप्तशती के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।