मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
दुर्गासप्तशती • अध्याय 12 • श्लोक 32
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र । दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम् ॥
जहाँ राक्षस हों, जहाँ उग्र विषधर नाग हों, जहाँ शत्रु और डाकुओं की सेनाएँ हों, जहाँ वनाग्नि हो या समुद्र के बीच संकट हो, वहाँ उपस्थित होकर आप ही इस विश्व की रक्षा करती हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
दुर्गासप्तशती के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

दुर्गासप्तशती के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें