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दुर्गासप्तशती • अध्याय 12 • श्लोक 3
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य । प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य ॥
हे देवी, शरणागतों के दुःखों का नाश करने वाली, प्रसन्न होइए; हे समस्त जगत की माता, प्रसन्न होइए। हे विश्वेश्वरी, इस समस्त विश्व की रक्षा कीजिए, क्योंकि आप ही चराचर जगत की अधिष्ठात्री ईश्वरी हैं।
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