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दुर्गासप्तशती • अध्याय 12 • श्लोक 10
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
हे सर्वमंगलों में भी श्रेष्ठ मंगलमयी, हे कल्याणस्वरूपा, सभी उद्देश्यों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली त्र्यम्बका गौरी नारायणी देवी, आपको नमस्कार है।
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