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दुर्गासप्तशती • अध्याय 11 • श्लोक 26
तमायान्तं ततो देवी सर्वदैत्यजनेश्वरम् । जगत्यां पातयामास भित्त्वा शूलेन वक्षसि ॥
तब देवी ने उस समस्त दैत्यों के स्वामी को आते देखकर उसके वक्षस्थल में शूल भेदकर उसे पृथ्वी पर गिरा दिया।
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