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दुर्गासप्तशती • अध्याय 11 • श्लोक 22
उत्पत्य च प्रगृह्योच्चैर्देवीं गगनमास्थितः । तत्रापि सा निराधारा युयुधे तेन चण्डिका ॥
फिर वह उछलकर देवी को पकड़ते हुए आकाश में जा पहुँचा, पर वहाँ भी चण्डिका बिना किसी आधार के उससे युद्ध करती रहीं।
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