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दुर्गासप्तशती • अध्याय 11 • श्लोक 18
हताश्वः स तदा दैत्यश्छिन्नधन्वा विसारथिः । जग्राह मुद्गरं घोरमम्बिकानिधनोद्यतः ॥
घोड़े मारे जाने, धनुष कट जाने और सारथि के नष्ट होने पर वह दैत्य अम्बिका को मारने के लिए भयंकर मुद्गर उठाकर खड़ा हुआ।
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