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दुर्गासप्तशती • अध्याय 10 • श्लोक 42
॥ स्वस्ति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये निशुम्भवधो नाम नवमोऽध्यायः । उवाच २, अर्धश्लोकाः ३९, श्लोकाः ४१, एवमादितः ॥
इस प्रकार श्रीमार्कण्डेय पुराण के सावर्णिक मन्वंतर में स्थित देवीमाहात्म्य का “निशुम्भवध” नामक नवम अध्याय समाप्त होता है। इसमें दो उवाच, उनतालीस अर्धश्लोक और कुल इकतालीस श्लोक हैं।
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