तमायान्तं समालोक्य देवी शङ्खमवादयत् । ज्याशब्दं चापि धनुषश्चकारातीव दुःसहम् ॥
उसे आते देखकर देवी ने शंख बजाया और अपने धनुष की प्रत्यंचा का अत्यन्त असहनीय शब्द किया।
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