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दुर्गासप्तशती • अध्याय 10 • श्लोक 13
छिन्ने चर्मणि खड्गे च शक्तिं चिक्षेप सोऽसुरः । तामप्यस्य द्विधा चक्रे चक्रेणाभिमुखागताम् ॥
ढाल और खड्ग कट जाने पर उस असुर ने शक्ति फेंकी, परंतु देवी ने अपनी ओर आती हुई उस शक्ति को भी चक्र से दो भागों में काट दिया।
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