हृदय का स्वरूप कमल की कली के समान माना गया है, जो एक आवरणयुक्त कोश के सदृश लटका हुआ प्रतीत होता है।
वह हृदयकमल नीचे की ओर मुख किए हुए स्थित है और उसकी सूक्ष्म रचनाएँ अनेक नाड़ियों द्वारा परिवेष्टित रहती हैं।
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