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चतुर्वेद • अध्याय 1 • श्लोक 3
विश्वमेवेदं पुरुषं तं विश्वमुपजीवति । ऋषिं विश्वेश्वरं देवं समुद्रे तं विश्वरूपिणम् ॥
यह सम्पूर्ण विश्व ही उस पुरुष (परम पुरुष) का स्वरूप है, और समस्त विश्व उसी पर आश्रित होकर स्थित है। वे ऋषि, विश्वेश्वर, देव तथा विश्वरूपधारी हैं, जो समुद्र (अनन्त चेतना अथवा कारण-सागर) में स्थित हैं।
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