यह सम्पूर्ण विश्व ही उस पुरुष(परम पुरुष) का स्वरूप है, और समस्त विश्व उसी पर आश्रित होकर स्थित है।
वे ऋषि, विश्वेश्वर, देव तथा विश्वरूपधारी हैं, जो समुद्र(अनन्त चेतना अथवा कारण-सागर) में स्थित हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
चतुर्वेद के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
चतुर्वेद के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।