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चतुर्वेद • अध्याय 1 • श्लोक 2
सहस्त्रशीर्ष देवं सहस्त्राक्षं विश्वसंभवम्। विश्वतः परमं नित्यं विश्वं नारायणं हरिम् ॥
सहस्र सिरों वाले, सहस्र नेत्रों वाले, समस्त विश्व के कारणभूत उस देव का स्मरण करो। वे सम्पूर्ण विश्व से परे, नित्य, और स्वयं विश्वस्वरूप भगवान् नारायण हरि हैं।
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