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चाणक्य नीति • अध्याय 9 • श्लोक 6
विद्यार्थी सेवकः पान्थः क्षुधार्तो भयकातरः । भाण्डारी प्रतिहारी च सप्त सुप्तान् प्रबोधयेत् ।।
इन सातो को जगा दे यदि ये सो जाए - १. विद्यार्थी २. सेवक ३. पथिक ४. भूखा आदमी ५. डरा हुआ आदमी ६. खजाने का रक्षक ७. खजांची
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