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चाणक्य नीति • अध्याय 9 • श्लोक 12
स्वहस्तग्रथिता माला स्वहस्ताद घृष्टचन्दनम् । स्वहस्तलिखितं शक्रस्यापि श्रियं हरेत् ।। इक्षुदंडास्तिलाः शुद्राः कान्ता कांचनमोदिनी । चन्दनं दधि ताम्बूलं मर्दनं गुणवर्ध्दनम् ।।
आपको इन्द्र के समान वैभव प्राप्त होगा यदि आप - अपने भगवान् के गले की माला अपने हाथो से बनाये। अपने भगवान् के लिए चन्दन अपने हाथो से घिसे। अपने हाथो से पवित्र ग्रंथो को लिखे।
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