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चाणक्य नीति • अध्याय 9 • श्लोक 10
निविषेणापि सर्पेण कर्तव्या महती फणा । विषमस्तु न चाप्यस्तु घटाटोप भयंकरः ।।
यदि नाग अपना फना खड़ा करे तो भले ही वह जहरीला ना हो तो भी उसका यह करना सामने वाले के मन में डर पैदा करने को पर्याप्त है। यहाँ यह बात कोई माइना नहीं रखती की वह जहरीला है की नहीं।
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