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चाणक्य नीति • अध्याय 8 • श्लोक 3
दीपो भक्षयते ध्वान्तं कज्जलं च प्रसूयते । यदन्नं भक्ष्यते नित्यं जायते तादृशी प्रजा ।।
दीपक अँधेरे का भक्षण करता है इसीलिए काला धुआ बनाता है। इसी प्रकार हम जिस प्रकार का अन्न खाते है। माने सात्विक, राजसिक, तामसिक उसी प्रकार के विचार उत्पन्न करते है।
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