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चाणक्य नीति • अध्याय 8 • श्लोक 20
विद्वान् प्रशस्यते लोके विद्वान्सर्वत्र गौरवम् । विद्यया लभते सर्व विद्या सर्वत्र पूज्यते ।।
विद्वान् व्यक्ति लोगो से सम्मान पाता है। विद्वान् उसकी विद्वत्ता के लिए हर जगह सम्मान पाता है। यह बिलकुल सच है की विद्या हर जगह सम्मानित है।
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