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चाणक्य नीति • अध्याय 8 • श्लोक 2
इक्षुरापः पयो मूलं ताम्बूलं फलमौषधम् । भक्षयित्वाऽपिकर्तव्याःस्नानदानादिकाःक्रियाः ।।
ऊख, जल, दूध, पान, फल और औषधि इन वस्तुओं के भोजन करने पर भी स्नान दान आदि क्रिया कर सकते हैं।
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