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चाणक्य नीति • अध्याय 8 • श्लोक 17
शुध्दं भूमिगतं तोयं शुध्दा नारी पतिव्रता । शुचिः क्षेमकरोराजा संतोषी ब्राह्मणः शुचिः ।।
जो जल धरती में समां गया वो शुद्ध है। परिवार को समर्पित पत्नी शुद्ध है। लोगो का कल्याण करने वाला राजा शुद्ध है। वह ब्राह्मण शुद्ध है जो संतुष्ट है।
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