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चाणक्य नीति • अध्याय 8 • श्लोक 15
गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम् । सिध्दिर्भूषयते वद्यां भोगी भूषयते धनम् ।।
नीति की उत्तमता ही व्यक्ति के सौंदर्य का गहना है। उत्तम आचरण से व्यक्ति उत्तरोत्तर ऊँचे लोक में जाता है। सफलता ही विद्या का आभूषण है। उचित विनियोग ही संपत्ति का गहना है।
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