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चाणक्य नीति • अध्याय 7 • श्लोक 4
सन्तोषस्त्रिषु कर्तव्यः स्वदारे भोजने धने । त्रिषु चैव न कर्त्तव्योऽध्ययने जपदानयोः ।।
व्यक्ति नीचे दी हुए ३ चीजो से संतुष्ट रहे - १. खुद की पत्नी २. वह भोजन जो विधाता ने प्रदान किया ३. उतना धन जितना इमानदारी से मिल गया लेकिन व्यक्ति को नीचे दी हुई ३ चीजो से संतुष्ट नहीं होना चाहिए - १. अभ्यास २. भगवान् का नाम स्मरण ३. परोपकार
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