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चाणक्य नीति • अध्याय 7 • श्लोक 21
पुष्पे गन्धतिले तैलं काष्ठे वह्नि पयो घृतम् । इक्षौ गुडं तथा देहे पश्याऽऽत्मानं विवेकतः ।।
जिस प्रकार एक फूल में खुशबु है। तील में तेल है। लकड़ी में अग्नि है। दूध में घी है। गन्ने में गुड है। उसी प्रकार यदि आप ठीक से देखते हो तो हर व्यक्ति में परमात्मा है।
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