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चाणक्य नीति • अध्याय 7 • श्लोक 20
वाचा शौचं च मनसः शौचमिन्द्रियनिग्रहः । सर्वभूते दया शौचमेतच्छौचं परार्थिनाम् ।।
यदि आप दिव्यता चाहते है तो आपके वाचा, मन और इन्द्रियों में शुद्धता होनी चाहिए। उसी प्रकार आपके ह्रदय में करुणा होनी चाहिए।
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