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चाणक्य नीति • अध्याय 7 • श्लोक 19
श्वानपुच्छमिच व्यर्थ जीवितं विद्यया विना । न गुह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे ।।
एक अनपढ़ आदमी की जिंदगी किसी कुत्ते की पूछ की तरह बेकार है। उससे ना उसकी इज्जत ही ढकती है और ना ही कीड़े मक्खियों को भागने के काम आती है।
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