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चाणक्य नीति • अध्याय 7 • श्लोक 13
यत्रोदकस्तत्र वसन्ति हंसा- स्तथव शुष्कं परिवर्जयन्ति । नहंतुल्येन नरेण भाव्यं पुनस्त्यजन्तः पुनराश्र यन्तः ।।
हंस वहा रहते है जहा पानी होता है। पानी सूखने पर वे उस जगह को छोड़ देते है। आप किसी आदमी को ऐसा व्यवहार ना करने दे की वह आपके पास आता जाता रहे।
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